हिमाचल में वित्तीय संकट: 3000 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की तैयारी

हिमाचल में वित्तीय संकट: 3000 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की तैयारी

Financial crisis in Himachal

Financial crisis in Himachal

शिमला। Financial crisis in Himachal: राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद हिमाचल सरकार के सभी विभागों ने अनावश्यक खर्चों में कटौती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, अतिरिक्त राजस्व जुटाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं। इस वर्ष 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पिछले तीन वर्षों में 3300 करोड़ रुपये कर राजस्व और 1600 करोड़ रुपये गैर कर राजस्व के माध्यम से जुटाए गए हैं। हाल ही में हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया था कि प्रत्येक विभाग मंत्रिमंडल को सूचित करेगा कि उसने क्या कदम उठाए हैं और उन कदमों से किस प्रकार का लाभ प्राप्त हुआ है। सार्वजनिक उपक्रमों की परफारमेंस से तय होगा कि वे बंद होंगे या नहीं।

निश्शुल्क पेयजल आपूर्ति बंद करने का सुझाव

बजट सत्र के दौरान विधानसभा में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में निश्शुल्क पेयजल की आपूर्ति बंद करने का सुझाव दिया था। इसी प्रकार, 16वें वित्तायोग ने प्रदेश सरकार को सब्सिडी को बंद करने या घटाने के निर्देश दिए थे। 

इन कदमों से 3000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना

  • वर्ष 2014 में बंद की गई एक प्रतिशत मार्केट फीस को 12 वर्ष बाद पुनः लागू किया गया है।
  • प्रदेश के बैरियरों पर वाहनों के लिए बढ़ाए गए टोल से लगभग 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त शुल्क प्राप्त होगा।
  • परिवहन निगम की बसों में अब हिम बस कार्ड धारक महिलाओं को 50 प्रतिशत निश्शुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल कनेक्शन के लिए मासिक 100 रुपये शुल्क वसूलने की तैयारी की गई है, जबकि भाजपा सरकार के समय 40 रुपये प्रति कनेक्शन लिया जाता था।
  • 26 वर्ष बाद राज्य में शुरू होने वाली लाटरी से 100-150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है।
  • जल विद्युत परियोजनाओं पर राजस्व कर पहली अप्रैल से लागू होगा, जिससे वार्षिक 1200 से 1800 करोड़ रुपये मिलेंगे।
  • सरकारी अस्पतालों में पर्ची का 10 रुपये शुल्क लिया जा रहा है और विभिन्न परीक्षणों की शुल्क दरें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

घाटा रोकने के उपाय

  • हिमाचल पथ परिवहन निगम ने 292 घाटे के रूटों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
  • ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिनके पास एक से अधिक वाहन हैं।
  • यह भी देखा जा रहा है कि अधिकारियों के पास ई-वाहन हैं और क्या वे उनका उपयोग कर रहे हैं।

आरडीजी बंद होने से 10 हजार करोड़ का नुकसान

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राज्य सरकार को सालाना 10 हजार करोड़ का नुकसान होगा। यानि पांच साल में 50 हजार करोड़ का नुकसान रहेगा। ऐसी स्थिति में राज्य की अगले वित्त वर्ष के दौरान आय 42 हजार करोड़ व्यय 48 हजार करोड़ होना तय है। 6 हजार करोड़ का घाटा पाटने के लिए सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसी स्थिति में राजस्व घाटा अनुदान से घाटे को पाटा जाना था। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद प्रदेश सरकार के सामने गंभीर वित्तीय स्थिति पैदा हो चुकी है। वर्तमान वित्त वर्ष में प्रदेश सरकार को 3257 करोड़ आरडीजी प्राप्त हो रहा है। 
 

आरडीजी बंद होने के बाद राज्य की स्थिति किसी से छुपी नहीं रही है। पिछली मंत्रिमंडलीय बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आय बढ़ाने और खर्चों में कटौती संबंधी उपाय लागू करने को कहा है। किस विभाग की ओर से क्या उपाय किए गए, उसकी जानकारी निकट भविष्य में आयोजित होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में संबंधित विभाग के सचिव को बतानी होगी।
-देवेश कुमार, प्रधान सचिव वित्त।